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तू होगा मुझे पसंद हद से ज्यादा तो भी क्या, मेरा ज़मीर कहता है पलट कर भी न देखूं तुझे।।
लोग पूछते है कि, लफ्ज़ कहाँ से लाते हैं, हम तो बस इस दिल का,हाल बतलाते है, ज़रा सी क़लम को,कागज़ पर रुलाते है, ज़नाब यूं ही नहीं हम,शायर कहलाते है ।।
खींच लाई है मोहब्बत तेरे दर पर मुझ को, इतनी आसानी से वर्ना किसे हासिल हुआ मैं ।
गहरे रंग से इश्क़ लाज़मी है, चाहे वो काला काजल हो या कड़क चाय..!
तुम लफ्ज़ बन कर समाये हो मुझमें, अब कागजों पे उतरे हो स्याही बन कर...!!
नसीहतों औऱ तजुर्बे हम भी लिखेंगे, अभी उम्र _ए _मोहब्बत है मुझे इश्क लिखने दो।
दिल ने पाई राहतें कम हुए कुछ गम, जब से मेरी जिंदगी में आ गए हो तुम।।
नजरंदाज उसे करूं जो नजर के सामने हो.. उसका क्या करूं, जो दिल में बस गया है।
तुम झूठ हो तो लोग तुम्हें सर चढ़ाएंगे, तुम सच हो तो किसी की ज़रूरत नहीं हो तुम ।
वो भी किस्तों में दिखाती है मुझे अदाएं अपनी, मुर्शिद वो होने भी नहीं देती मुझे पूरा पागल।।
ख्वाबो ही ख्वाबो में फिंर शाम हो चली, हमारी भी जिंदगी यूंही तमाम हो चली, शोहरत भी हमारी बेवफा हे तेरी तरह, तेरे नाम से जुडी तो बदनाम हो चली , तुझपे ये वक्त जाया अब क्यूं करे कोई, वो चीज जो अलग थी अब आम हो चली, तेरी भी जिंदगी क्या खुब है, गुलशन सी जो सजी थी शमशान हो चली ।
उस का मुझ पर जो है असर देखिये, मैंने लिखा है उस को पढ़ कर देखिये ।
तू मेरा नहीं है इस बात का , मुझे अब मलाल नहीं है। दिल पहले बहुत दुखता था , अब दिल का वो हाल नहीं है|इंतिज़ार में गुज़रे थे मौसम , अब वो महीना वो साल नहीं है। जाना है जादू तो मेरे इश्क़ में था , तू इतना भी बे-मिसाल नहीं है।।
हमे मालूम था अपनी दिल्लगी का नतीजा, तभी मोहब्बत से पहले शायरी सीखी थी हमने.... !!
हमने बहुत देखे हैं इश्क़ में जान देने वाले... पर क्या करे हुज़ूर हर दिल्लगी आशिकी नही होती......
तुम्हारे साथ किसी मंजिल की तलब नहीं है, बस जहाँ तक राह चले ,हमसफ़र बने रहना...!!
आँखें जो खुली तो उन्हें अपने करीब ना पाया, थी रूह में जो शामिलआज उनका साया ना था, हम ही कसीदे हुस्न के हर बार पढ़ते रहे उनके, उसने तो कभी हाल-ए-दिल सुनाया भी ना था, जाने क्यों हम बेवजह मदहोश हुआ करते थे, जाम आँखों से कभी उसने पिलाया भी ना था ।
हसीन सफर है संग तू अगर है, मत पूछ मोहब्बत हमे किस क़दर है..!! पल पल हर पल बस तेरी फ़िक्र है, जहां भी देखूं बस तेरा जिक्र है..!! दवा - ए - इश्क़ जो दी तूने हर दर्द अब बे असर है, वाक़िफ तो है तुझसे मगर, दिल खुद से बे खबर है..!!
छुआ हुआ हूं कई बार तेरे हाथों से, ये मेरे पास तेरी आखरी निशानी है.... 💔
वो एक शख्स मेरे ख्यालो मे बार बार आता है, शायद वो भी मुझे बेपनाह चाहता है, करनी तो हैं हमको एक दुसरे से ढ़ेर सारी बाते, पर ये मन ना जाने क्यो बेवजह नाराज़गी दिखाता है।
कहीं रूह का होता है, कहीं जिस्म होता है, इस जहाँ में इश्क़ भी दो किस्म का होता है।
किस कदर तेरी चाहतों को हम अपने पास लिए बैठें हैं, तू नही है मेरा फिर भी हम तेरी आस लिए बैठें हैं।
पढ़ले मेरे दिल को मेरे चेहरे से ; मुकम्मल तरीके से बेनकाब हुं मैं । तू आंखे मूंदकर महसूस कर मुझे; एक नाजुक मिजाज ख्वाब हूं मैं । सोच सोच के तू परेशा क्यूं है ; सीधी साधी खुली किताब हूं मैं । मुझे न समझ तेरे रास्ते का पत्थर ; हर तख्तों ताज से इज्तीनाब हूं मैं ।।
बेहद खूबसूरती है तेरी यादों के किस्सों में,️ सिर्फ तुम ही तुम हो मेरे हर एक हिस्से में..!!!
उतर तू भी किसी रोज़ रूह में मेरी, जैसे रोज़ उतरते हैं आँखों में ख़्वाब तेरे...!!
दिल की बात सुन लो कभी तो, ख़ुद को भी खुला छोड़ो कभी तो, प्यार तो करते हो हमसे तुम भी, इज़हारे मुहब्बत भी कर लो कभी तो, क्या रखा है ख़ुद में घुट कर रहना, खुल कर अपनी बात भी रखा करो कभी तो, ज़िन्दगी बहुत ख़ूबसूरत है, रंग इसमें अपनी मुहब्बत के भर लो कभी तो।
कभी सुकून की चुस्की , तो कभी उलझन का किस्सा है। चाय सिर्फ चाय नहीं, हमारी जिंदगी का हिस्सा है॥
ख्वाईश बस इतनी हैं कि कुछ ऐसा मेरा नसीब हो, वक्त चाहे जैसा भी हो, बस तुम मेरे करीब हो।
कुछ देर की शायरी नहीं, ज़िन्दगी भर की कहानी हो तुम..!!
ऐसे याद आकर बेचैन ना किया करो, ये सितम ही काफी है कि बहुत दूर हो तुम।
उनसे नज़र हटाकर कैसे जिए कोई, छलकी हुई शराब है कैसे पिए कोई, जीने की आरज़ू पहले थी अब मगर, मरने को बेक़रार है उनके लिए कोई।।
बहिश्त (स्वर्ग) हो या फिर ज़मीं हो, लाऊँ कहाँ से जो इतना हसीं हो, तुमको ही कर दूँ मुकाबिल तुम्हारे,तुम से हो बेहतर तो बस तुम्हीं हो..!
उसे इश्क़ किसी और से था, पर मेरा शिद्दत से चाहना पसंद था उसे।
उस का मुझ पर जो है असर देखिये, मैंने लिखा है उस को पढ़ कर देखिये ।
तुम्हें देख कर लगता है, तुम्हारे अलावा कुछ ना देखू....!
गजल में इश्क लिखते है, तो चाहत साँस लेती है... हमारी धड़कनो में खुद आपकी मुहब्बत साँस लेती है।
हम दोनों को कोई भी बीमारी नहीं है, फिर भी वो मेरी,मैं उसकी दवा हूँ..😘
रूठ जाने की सदी अब गुज़र गई, अब नज़र अंदाज़ करने का ज़माना है ।
तुम्हें इतना जो भाते हैं तुम्हारे कान के झुमके, चलो हम भी हो जाते हैं तुम्हारे कान के झुमके..!
तुम न मिल पाए तो शिद्दत से ख्याल आने लगा, हाय उन लोगों की तकलीफ़ जिन्हें हम न मिले!
आज तेरा ख्याल बड़े ही दिलचस्प मोड़ पर आया है, लबों पर सजा है तेरा नाम और आंखों में इश्क़ उतर आया है ।❤️❤️
इक सहमी सहमी सी आहट है इक महका महका साया है, ये एहसास तुम्हारी मोहब्बत का ना जाने क्या रंग लाया है, ए यार सनम कुछ तू ही बता तू मुझे इतना क्यों भाया है, ये दिल प्रेम खोज में निकला था और तुझ को ढूँढ के लाया है।
इत्तेफ़ाक से मिल जाना कमाल है, यूँ मेरी ज़िंदगी में आना कमाल है। दीदार की बड़ी हसरत है लेकिन, बातों से दिल चुरा लेना कमाल है। हज़ारों ख़्वाहिशों के साथ दिल का, तेरी आँखों में उतर जाना कमाल है। चंद लम्हों में न जाने कितने चराग, यूँ मुहब्बत के जला देना कमाल है।
ये बेकरारी ये कसक ये जुनूं इश्क है..वो तेरी बांहो का सुकूं इश्क है..वो मेरा मिलने को तरसना इश्क है..और तेरा खुल के बरसना इश्क है..मेरा इंतज़ार मे बिख़रना इश्क है..और तेरे दीद पे निख़रना इश्क है..मेरा लिख लिख के मिटाना इश्क है..और तेरा अनकही सुन पाना इश्क हैं..
किस्मत से अपनी सबको, शिकायत क्यों है...!जो नहीं मिल सकता उसी से , मोहब्बत क्यों है...! कितने खड़े है राहों पे फिर भी दिल को उसी की चाहत क्यों है...!!
जा-बजा दिल को लगाने से कहाँ भूलेगा, हमको वो शख़्स भुलाने से कहाँ भूलेगा, हाँ कई रोज़ से वो याद नही आया मगर, वो फ़क़त याद ना आने से कहाँ भूलेगा । *जा-बजा = जगह जगह
हमारे प्यार की तुमको कहानी याद आयेगी, मिले दरिया जो सागर से रवानी याद आयेगी..!! कभी तुमने दिया हमको कभी हमने दिया तुमको, पलटकर देख लेना वो निशानी याद आयेगी..!!
किसी के उतने ही रहो, जितना वो तुम्हारा है।
जुबां से बयान हो तो तौहिन ए मोहब्बत है... महबूब का मतलब है के निगाहों को पढ़ ले !!
चेहरों की इतनी फ़िक्र क्यूँ है, रंगों की इतनी क़द्र क्यूँ है ? हुस्न अस्ल किरदार का है, गोरा काले से बेहतर क्यूँ है ?हसरत को कैसे समझाऊँ, इतनी छोटी चादर क्यूँ है ? नीयत का दोष ही सारा है, तो फ़िर बदनाम नज़र क्यूँ है ?
कुछ नहीं चाहा था उसे छोड़कर , सबकुछ मिला बस एक उसे छोड़कर..!
पत्थर में एक ही कमी है की वह पिघलता नहीं, लेकिन यही उसकी खूबी है वह बदलता भी नहीं।
चाय सी तासीर है मोहब्बत की, हड़बड़ी में जला देगी ,चुस्कियों में मजा देगी ।
फसाने तुमारे भुलाए कहां है, अभी दिल पे ताले लगाए कहां हैं..!! दिखो जब जहां भी हुआ दिल जवां है, मुहब्बत किया है भुलाए कहां हैं..!! मिलो फिर बताए कि रूह ए रवां हो, इशक की तमन्ना दबाए कहां हैं..!! मिले राह में खूब सारे मगर, तुमे छोड़ दिल में बसाए कहां हैं..!!
वो दिल दुखा कर भी सही🤦♂ हम सब सह कर भी गलत🤷
उन दोनो ने ही अपने अपने रास्ते चुन लिए... एक ने बाप की इज्जत रख ली, दूसरे ने पहले वाले के फ़ेसले का मान.....
शायर हूँ तो ग़मों से क्यों करूँ परहेज़, हालात् जितने नाज़ुक मेरी कलम उतनी ही तेज़....
उस से पूछो आज़ादी रास्तो की, जिसका साथी रास्ते में बिछड़ा हो.......
उदासी देख उसकी मन घबरा रहा मेरा, ना जाने इश्क़ कर उसे खुशी दी या बिन वजह गम ईनाम दिया है मैंने...... उसे
मैं खुद उलझी हु अपनी कहानी में, मैं कहा से किसी किस्से का किरदार बनू...
मेरा ये इश्क़ सलामत रहेगा, तुम्हारा हुस्न दिलनशी रहे या ना रहे ..!!
बेवजह दिल पे कोई , बोझ ना भारी रखिये । जिंदगी जंग है इस, जंग को जारी रखिये ।। कितने दिन जिन्दा रहे इसको ना गिनिए । किस तरह जिन्दा रहे, इसकी शुमारी रखिये ।।
वो पेंसिल सी उसकी सारी गलतियां माफ, मैं कलम सा हर गलती पे खड़ा हूं कटघरे में !
काश फिर मिलने की वजह मिल जाए, साथ जितने भी बिताये वो पल मिल जाए, चल अब अपनी आँखें बन्द कर ले, क्या पता ख्वाब में गुजरा हुआ कल मिल जाए।
बस यही गुमान बस यही गुरूर रहता है, तू जुदा ही सही पर दिल में रहता है।।
लोग पहले वादा करेंगे फिर मुकर जाएंगे, गलतियां करके बोलेंगे हम सुधर जाएंगे, उम्मीद की राहें दिखा कर ना जाने किधर जाएंगे, रुकने का भरोसा देकर फिर निकल जाएंगे, उन्हें फ़र्क भी नही पड़ेगा और आप बिखर जाएंगे।
कोरे कागज सी इस जिंदगी पर जो भी लफ्ज़ उकेरे हैं... इनमें ज़िक्र सिर्फ उनका हैं जो मेरे ना होकर भी मेरे हैं।
हर बार उसी से गुफ़्तगू सौ बार उसी की आरज़ू, वो पास नहीं होता तो भी रहता है मेरे रूबरू।
दिल तो क्या चीज है हम रूहों में उतरे होते, तूने चाहा ही नहीं चाहने वालों की तरह ..!!🖤
कभी लफ़्ज़ों में कशिश कभी शायरी में नशा, हुआ जो तेरा असर अब मुझे होश कहाँ...!!!
हिस्सा हिस्सा तुझे लिखू कैसे, किस्सा किस्सा मेरी क़िताब हैं तू, तेरी आँखों के चंद ख्वाबो में, मेरी किस्मत की हँसी रात हैं तू, कैसे लिख दू के दूर हैं कितना, मेरी साँसों के साथ साथ हैं तू।
न जाने ये मोहब्बत हमे किस राह पे ले आयी है, उसे छोड़कर हर शख्स हमे गैर नजर आया है।
नहीं चाहिए कोई दूसरा ख़्याल, ज़हन में मेरे बसा है सिर्फ़ तू ही तू….♥️♥️
ज़रा ज़रा सा मुझमें मैं,वो बे-शुमार मुझमें है...वो एक ही तो शख़्स है जो बार-बार मुझमें है।
अहसास नहीं बदलते दूरियों के साथ, वो आज भी धड़कता है मेरी हर एक सांस के साथ।।
सुनो जाना, कभी तलाशो हमें तो...खुद मे जरूर तलाशना....यकीनन....!! तुममे बेशुमार मिलेंगे हम... 🥰❤️
कहीं लगता ही नहीं दिल , तुमसे दिल्लगी लगाने के बाद..!इंतजार तो इंतजार ही रहा , तेरे आने से पहले तेरे जाने के बाद..!!
आप सभी दोस्तों का भाइयों और बहनों का तहे दिल से शुक्रिया यहां तक पहुंचाने के लिए। ऐसे ही प्यार और मोहब्बत बनाए रखें। और जल्दी से जल्दी 50K भी पूरे करवा दें।😊😊😘
माना सांसों के लिए हवा, दिल के लिए धड़कन ज़रूरी है, मगर ये दोंनो यूँ हीं चलतीं रहें, इसके लिए तेरा होना ज़रूरी है।
हमारी शायरियों में है तारीफ़ एक चेहरे की, जिनकी मौजदूगी से महकती हैं शायरियां हमारी ..🌹🌹
आज फिर यादों ने दस्तक दी, और जहन में उनका चेहरा छा गया, कुछ बीते लम्हे छू गए फिर से, और ज़ुबां पे उनका नाम आ गया..!!
कह देता हूँ वैसे मेरा कहना नहीं बनता, इस दिल के इलावा कहीं और तेरा रहना नहीं बनता।।
अजनबी तो हम जमाने के लिए है, आप से तो हम शायरियो मे मुलाकात कर लेते है...!!!
हिंदी मुझे उतनी ही प्रिय है, जितनी की आपको मेरी शायरियां.....❤️❤️
उलझते-सुलझते हुए ज़िन्दगी के ये लम्हें, और खुशबू बिखेरता हुआ तेरा महकता सा ख़याल।
तुम्हारे शहर आऊंगा। बस एक शाम बिताऊँगा। कुछ अधूरी बातें बता देना। दिल के नासूर ज़ख्म दिखा देना। मुझे तेरा शहर नही घूमना। मुझे बस तेरी आँखों मे है डूबना। तेरी आँखों मे छुपे दर्द को बाहर है लाना! औऱ जब तू रो देगी,तुझे जी भर कर गले लगाना!
कभी किसी रास्ते पर ऐसा जाऊं कि वापस न आऊं तो कैसा हो! कभी मैं तुझे मिलने बुलाऊँ औऱ ख़ुद मिलने न आऊं तो कैसा हो! कभी तुम्हें महफ़िल में ले जाऊं और ख़ुद महफ़िल में खो जाऊं तो कैसा हो। कभी तुम्हें ख़ुद के लिए बेचैन बनाऊं और ख़ुद चैन से सो जाऊं तो कैसा हो। कभी मैं ख़ुद को दिखाऊँ और तुम्हें तुमसे मिलाऊँ तो कैसा हो। कभी तुम्हें ख़ुद को बेबस बताऊं और फिर बेपनाह प्यार जताऊं तो कैसा हो। कभी तुम्हें अपनी मोहब्बत बताऊं और फिर मुकर जाऊं तो कैसा हो।
सुनो आज अपनी क़िस्मत सुनाता हूँ। गिरता बहुत हूँ, पर वक़्त रहते संभल जाता हूँ। वैसे हमदम मेरे बहुत सारे है। पर ज़रूरत पर दोनों हाथ ख़ाली पाता हूँ। सोचा था इस साल उसे भूल जाऊँगा। खुद को हर लम्हा उसके क़रीब पाता हूँ। मैंने ख़ुद बग़ावत कई बार करनी चाही। उसकी एक आवाज़ औऱ मैं खुद को चलता पाता हूँ। तकलीफ़ कितनी भी हो इस बेबस दिल को। मग़र ख़ुद को मुस्कुराता पाता हूँ। मुझे आबाद करने में चांद तारे सब थे। आज भीड़ में भी ख़ुद को अकेला पाता हूँ। किसी ने कहा था मुझसे हँसने से ग़म दूर हो जाते है। अब समझे मैं बेवज़ह क्यों मुस्कुराता हूँ।
ज़िन्दगी के धागे सुलझाना चाहता हूँ। किसी बिखरे हुए शख्स के पास जाना चाहता हूँ। मेरे सीने का जो दर्द पढ़ ले,बस उसे सीने से लगाना चाहता हूँ। बर्बादी के किस्से छोड़ आबादी के गीत गुनगुनाना चाहता हूँ। वैसे तो खुदा पर विश्वास रहा नहीं, पर उस शख्स को ख़ुदा बनाना चाहता हूँ। हैरत होती कभी ख़ुद को सोच कर,उसे सोच सोच अब मुस्कुराना चाहता हूँ। बीता कल बीती बातें, सब भूलकर उसे आज दिखाना चाहता हूँ। पढ़कर जो मुझे दिल से मुस्कुराए, मैं उसे अपने लफ़्ज़ों में लाना चाहता हूँ। होता है जीना मरने से मुश्किल। बस ये बात अब दुनिया को बताना चाहता हूँ।
हमारी दास्तां उसे कहां कबूल थी, मेरी वफायें उसके लिये फिजूल थीं, कोई आस नहीं लेकिन कोई इतना बता दो, मैंने चाहा उसे क्या ये मेरी भूल थी..?
ऑंखें बंद कर जे़हन में झांक लेता हूँ, बिखरे बिखरे से हैं एहस़ास संवार देता हूं, खुशी गम चाहत नफ़रत सब जेवर हैं दिल के, कैसे उतार फेंकूं सो पन्नों पे वार देता हूं ।।
तुम उन खुशियों में खुश रहो, जो तुम्हें मेरे बगैर मिलती हैं, मैं उस हर लम्हें में खुश हूं, जिनमें तुम मेरे साथ होते हो...
मैं बिखर जाऊं समेटें मुझे उसकी आंखें, अपनी पलकों पे सजा लें मुझे उसकी आंखें, रूठ जाऊं तो इशारे से मना लें मुझको, और खो जाऊं तो ढूंडें मुझे उसकी आंखें, घर की दहलीज़ से लगकर मिरा रस्ता देखें, देर से आऊं तो बोलें मुझे उसकी आंखें।
इत्र की महक दामन में हो या ना हो, जज़्बात और अल्फ़ाज़ हमेशा महकदार होने चाहिए।
कोई सुकूँ की फरियाद करता है , कोई जाँ जाने तक याद करता है, "इश्क़" के पास तरीके बहुत हैं , ये तरह-तरह से बर्बाद करता है !!
जिक्र जब कोई जिन्दगी का करे, हम तसव्वुर में सिर्फ तुम्हें लाते हैं ।
कौन पढ़ता है बेवजह यूँ इन शायरीयों को, कोई इनमे अपना इश्क़ तो कोई अपना दर्द ढूंढता हैं|
आफ़रीन-ए-क़मर है हुस्न उसका, तो ये गुमान लाज़िम है।
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