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100+ New Hindi Shayari 2022 | Shayari and Jokes - WhatsApp Status Life

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बादलों से कह दो जरा संभल के बरसे,अगर हमें उसकी याद आई तो मुकाबला बराबरी का होगा..!!

 

दर्द को कम लिखने लगा हूँ, वो क्या है न अब सहने की शक्ति कम गयी थोड़ी

कभी कभी ऐसा होता है कि दो इंसान एक दूसरे को बेहद चाहते हैं और एक दूसरे से बेपनाह मोह्हबत करते हैं... लेकिन वे इस बात को बताए बिना ही जिंदगी गुजार देते हैं.....

 

लिखते-लिखते मैंने नोटिस किया कि लोग नकारात्मक अल्फाज़ो के प्रति जल्दी आकर्षित हो जाते हैं, वहीं सकारत्मक विचारों के प्रति उनका कोई विचार नही रहता.... ये नाकारात्मकता की ओर खिंचाव ही सभी दुःखों का कारण है... जितना सही सोचेंगे उतनी ही सही चीज आपके जीवन मे खिंचे चले आएंगे.....!!

सच्चा प्यार वही होता है, जो आपको आपके लक्ष्य को प्राप्त करने में सहयोग करे..आपको इनकरेज करे..आत्मविश्वास बढ़ाए और संतुलित वातावरण बनाये रखे..न कि दिन रात बात करने और घण्टों वीडियो कॉल के सामने बैठ कर समय काटने को कहे और जब बात शादी की आये तो यह कह कर छोड़ दे कि निठल्ले हो तुम..!!

 

तन्हा ही मर जाऊंगा एक दिन.....

 

गम नही अगर कोई समझ ना सके मुझको,मैं फुरसत की चीज़ हूँ और ज़माना जल्दबाज़ी में है।।
जिसका वजूद नहीं, वो हस्ती किस काम की,,जो मजा ना दे, वो  मस्ती किस काम की, जहां दिल ना लगे, वो बस्ती किस काम कीहम आपको याद ना करें, तो फिर हमारी दोस्ती किस काम की!!! 
तुम्हारी इन कातिल नज़रों को किसी की नजर न लगे...यूँ ही अपने आँखों से मुस्कुराती रहना .... 
मैंने तो बता दिया है अपनी दिल की बातों को..उनका जवाब ही न आया तो मैं क्या करूँ....!! 
कितनी शोर है जिंदगी में, यह हमे रातों में ही एहसास होती है .... 
जो चीजें तुम्हे तोड़ती है, कमजोर करती है..तुम्हे जीवन मे आगे बढ़ने नही देती..उसका पीछा करना बंद करो..वरना ये तुम्हें जीवन मे कभी आगे बढ़ने नहीं देगी... 
तेरी तलब मे, बैठा है दिल बेचारा, तेरे इश्क़ मे डूब जाऊं, चाहिए नहीं मुझे कोई किनारा । 
ये मेरा नाज़ुक सा दिल है इसे कभी मत तोड़ना, किसी भी बात पर हमसे कभी न मुँह मोड़ना, हम ज़रा नादान है हमारी थोड़ी सी परवाह करना, और ये दोस्ती कभी भी हमसे मत तोड़ना. 
देख मोहब्बत का दस्तूर, तू मुझ से मैं तुझ से दूर तन्हा तन्हा फिरते हैं, दिल वीराँ आँखें बे-नूर दोस्त बिछड़ते जाते हैं,शौक़ लिए जाता है दूर हम अपना ग़म भूल गए, आज किसे देखा मजबूरदिल की धड़कन कहती है, आज कोई आएगा ज़रूर कोशिश लाज़िम है प्यारे, आगे जो उस को मंज़ूर सूरज डूब चला 'नासिर', और अभी मंज़िल है दूर
100+  New Hindi Shayari 2022 - WhatsApp Status Life

प्यास तो पानी से बुझेगी, मैं शराब का क्या करूंगा फिर लड़कियां भले ही बेहिसाब हो, तेरी कमी है ज़िन्दगी में मैं बेहिसाब का क्या करूंगा
वैसे तो सिंगल हूँ लेकिन भगवान ने शक्ल ऐसी दी है कि लोगों को पूरा शक है..
मैं उसका हूं यह राज तो वह जान चुकी है, वो किसकी है यह सवाल मुझे सोने नहीं देता.
उसकी बेवफाई के गम में नहीं डूबा मैं वो मुझे मेरे आंसुओ में डूबना चाहता है मैं दुनिया के डर से जूठा क्या मुस्कराया वो मुझे फूट फूट कर रुलाना चाहता है और इंतहा तो देखो उसकी बेवफाई की जरा बादलों से कह दो बरसात ना करे वो हमारी आंखों को आजमाना चाहता है।
मुझे "तलाश" है उन "रास्तों" कि, जहां से कोई "गुज़रा" न हो, सुना है "वीरानों" मे "अक्सर", "जिंदगी" मिल जाती है..!
कल हवा में बिखर गया था मैं, फिर न जाने किधर गया था मैं, वो था इक ख़त्म होते रस्ते सा, उसपे चलकर ठहर गया था मैं, देर तक उसका इन्तेज़ार किया, फिर अकेला ही घर गया था मैं, उसकी आंखों में एक दरिया था, जिसमें इक दिन उतर गया था मैं।
राह जहा तक जाएगी, राहगीर वहा तक जाएगा, दरिया से पूछ रहे हो,की नीर कहा तक जाएगा, खींच डोर और निशाना साध अपनी मंजिल का, बाद में देखेंगे तीर कहा तक जाएगा।
अपने हाथों की रेखा से ज्यादा दिल ने चाहा है तुम्हें अपने दिल की धड़कनों से ज्यादा रुह में बसाया है तुम्हें भूलकर खुद को इस कदर चाहा है तुम्हें खुद की रुह से भी ज्यादा खुद में  सजाया है तुम्हें
सौ बार कहा दिल से...चल भूल भी जा उसको... हर बार कहा दिल ने...तुम दिल से नहीं कहते..!
पटरी पे रख के कम्बख्त इश्क पर ट्रेन चढ़ा दो फिर भी बच जाए तो इसपर क्रेन चढ़ा दो
सब लिखा जा चुका फसाने में, गुल ही शामिल थे गुल खिलाने में, कौन मेरी कहानियां सुनता, सब तो मशरूफ थे अपनी सुनाने में..!!
मैने अपना इश्क ज़माने से महफूज रखा है महफिलों मैं हमेशा उस का एहतराम किया है अवाम से ये रिश्ता मैने अनजान रखा है हुई जब भी मुलाकात तन्हाइयो मैं उसे जान कहा है
कोई सिखा दे हमें भी वादों से मुकर जाना अब बहुत थक गये हैं हम भी निभाते निभाते
काश कोई मिले इस तरह की फिर जुद़ा ना हो, जो समझे मेरे मिजाज़ को और कभी मुझसे खफ़ा ना हो..
अक्सर सूखे हुए होंठों पर ही मीठे लहजे हुआ करते हैं प्यास बुझ जाए तो अल्फ़ाज़ और इंसान दोनों बदल जाया करते है
एक दिन हम भी कफ़न ओढ़ जाएँगे...हर एक रिश्ता इस ज़मीन से तोड़े जाएँगे....जितना जी चाहे सतालो यारो...एक दिन रुलाते हुए सबको छोड़ जाएँगे..
"मेरी जेब में जरा सा छेद क्या हो गया..... सिक्कों से ज़्यादा तो रिश्ते गिर गये....."
सिमट गया मेरा प्यार चन्द लफ़्हज़ों में, उसने कहा प्यार तो है पर तुमसे नहीं किसी और से।।
माना कि अनमोल हैं, हसरत-ए-नायाब हैं आप.. हम भी वो लोग हैं जो, हर दहलीज़ पर नहीं मिलते...
सब अपनी बात सुनाना चाहते है सुनना कोई नही चाहता सब ख़ुद को सही  दुसरो को गलत ठहराना चाहते है सब खुद को अच्छा और दुसरो को बुरा बताना चाहते है
तेरी होठों की लाली चुराकर, तेरा अंग महका दूंगा,, जो बुझ चुकी है आग,,, तेरे अंदर इश्क़ की,,, आज मैं उसे भी सुलगा दूंगा!!
मिले जो अगर वो खुदा मुझे तो पूछूंगा उसे कि मेरी किस्मत को, ऐसा क्यों बना दिया झुकना पड़ा मुझे हर, छोटे बड़े के सामने उसने इतना नीचे, क्यों मुझ को गिरा दिया
महलों ये तख़्तों ये ताजों की दुनिया ये इंसाँ के दुश्मन समाजों की दुनिया ये दौलत के भूके रिवाजों की दुनिया ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है
मेरे महादेव.... जो चाह से मिलता हे उसे चाहत कहते हैं जो मांगने से मिलता है उसे मन्नत कहते हे जो बिना चाहे बिना मांगे मिले जाये उसे मेरे महादेव की रहमत कहते हे..💌
मोहब्ब्त..,एक अदा से शुरू एक अंदाज़ पे खत्म होती है...नज़र से शुरू हुईं मोहब्बत नज़रअंदाज़ पे खत्म होती है...
मुझे जिंदगी का इतना तजुर्बा तो नहीं, पर सुना है सादगी में लोग जीने नहीं देते।
ख्वाबो को देख कर यूं ख्याल बदल जाते हैं तुझको देखकर दिल के हाल बदल जाते हैं कहना चाहता हूं बहुत कुछ तुझ से अब जब तेरी आँखों में देखता हूँ तो मेरे सवाल बदल जाते हैं
यूँ तो मुझे बदनामी अपनी अच्छी नहीं लगती, मगर लोग तेरे नाम से छेड़ें तो बुरा भी नहीं लगता !!
मेरे दिल से हों, या ये तेरे, दिल से हों प्यार के ये अल्फ़ाज़ निकलने चाहिए दूसरों को भी, खुशियां दो ऐसे हमेशा सभी दोस्त बस यूं साथ चलने चाहिए
लबों तक आकर भी जुबां पर न आए.. मोहब्बत में सब्र का वो मुकाम हो तुम...
मैं सुरज के साथ रहकर भी भूला नहीं अदब, लोग जुगनू का साथ पाकर मगरुर हो गये।
जिंदगी में आप साथ हो या ना हो मैं आपकी याद में हमेशा  रहता हूं आप जहां भी रहे खुश रहे हैं हमारा क्या हम तो कल भी आपकी यादों में खोए थे और आगे भी खोए रहेंगे
दुनिया के सारे हक़, सारे फैसले तेरे मुझे क्या चाहिए इक मेरे किरदार के सिवा
यूं बदलने का अंदाज जरा हमें भी तो सिखा दो जैसे हो गए हो तुम बेवफा वैसे हमें भी बना दो
नक़ाब में कहा छुप पायेगा., शबाब-ए-हुस्न, निगाह-ए-इश्क तो, पत्थर भी चीर देती है ।
कैसे  तुम  भूल  गए  हो मुझे आसानी से, इश्क़ में कुछ भी तो आसान नहीं होता है🙂
न छेड़ मेरे बीते हुए कल को ये बहुत दुःख भरी कहानी है मैंने जिसको माना था वो भी एक दुःख भरी कहानी है रख भरोसा खुद पे तेरा कर्म तेरे काम आएगा
तुझे चंद शायरी में कैसे मै बयां कर दूं मेरे जन्मों का ख़्वाब और वर्षों का इंतजार है तू।
ख़वाबों में जीने की जब आदत पड़ जाती है, हक़ीक़त की दुनिया तब बे-रंग नज़र आती है, कोई इंतज़ार करता है मोहब्बत का, तो किसी की मोहब्बत इंतज़ार बन जाती है।
इश्क़ है या कुछ और ये पता नहीं, पर जो तुमसे है किसी और से नहीं ! मुझे तेरा साथ ज़िन्दगी भर नहीं चाहिये, बल्कि जब तक तू साथ है तबतक ज़िन्दगी चाहिए !
बड़े जिद्दी थे आंसू मेरे आंखो से बह गए मोहब्बत के एहसास को बहा कर ले गए
एक चेहरा जो मेरे ख्वाबों को सज़ा देता है मुझे खुश रहने की वजह देता है...वो मेरा कौन है मालूम नही लेकिन, जब भी मिलता है पहलू में जगह देता है....मैं जो कभी अंदर से टूटकर बिखरूं, वो मुझे थामने के लिए हाथ बढ़ा देता है... मैं जो तन्हा कभी चुपके से रोना भी चाहूं, वो दिल का दरवाज़ा खटखटा देता है....उसकी बातों  में जाने कैसा जादू है, एक ही पल में सदियां भूला देता है....
इतनी कमजोर न थी मेरी मोहब्बत, याद तो तुम्हें भी बहुत आती होगी....
होठ !!! लगे जब कांपने... करने में ईजहार !!! तब...!!! आंखों ने ही...कह दिया... हम को तुम से है प्यार
लाख रहे दूरियां तो क्या हुआ याद नजरों से नहीं दिल से किया जाता है
हमसे मत पूछो जिंदगी के बारे मे.. अजनबी क्या जाने अजनबी के बारे मे...
कसूर तो था ही इन निगाहों का, जो चुपके से दीदार कर बैठा। हमने तो खामोश रहने की ठानी थी,पर इश्क में जुबान इजहार कर बैठा।।
सांसे तो रोक लू अपनी,ये तो मेरे बस में है! यादें कैसे रोकू तेरी, तू तो मेरी नस-नस में है।
पलकों में आँसु और दिल में दर्द सोया है, हँसने वालो को क्या पता, रोने वाला किस कदर रोया है, ये तो बस वही जान सकता है मेरी तनहाई का आलम, जिसने जिन्दगी में किसी को पाने से पहले खोया है..!!
कलम चलती है तो दिल की आवाज लिखता हूँ, गम और जुदाई के अंदाज़-ए-बयां लिखता हूँ, रुकते नहीं हैं मेरी आँखों से आँसू, मैं जब भी उसकी याद में अल्फाज़ लिखता हूँ।
ये ठोकर खाया हुआ दिल है जनाब, भीड़ से ज़्यादा इसे तन्हाई अच्छी लगती है..!!
ज़िंदगी से शिकवा नहीं कि, उसने गम का आदी बना दिया... गिला तो उनसे हैं जिन्होंने, रोशनी की उम्मीद दिखा के दिया ही बुझा दिया.....
उससे कह दो कि मेरी सज़ा कुछ कम कर दे, हम पेशे से मुज़रिम नहीं हैं बस गलती से इश्क हुआ था ।
जिंदगी भर कौन साथ देता है लेकिन जहां तक मुमकिन हो साथ दो
जो भी दुख याद न था याद आया; आज क्या जानिए क्या याद आया; याद आया था बिछड़ना तेरा; फिर नहीं याद कि क्या याद आया; हाथ उठाए था कि दिल बैठ गया; जाने क्या वक़्त-ए-दुआ याद आया; जिस तरह धुंध में लिपटे हुए फूल; इक इक नक़्श तेरा याद आया; ये मोहब्बत भी है क्या रोग जिसको भूले वो सदा याद आया।
❝जब ख़ामोश आँखों से बात होती है, ऐसे ही मोहब्बत की शुरुआत होती है, तुम्हारे ही ख्यालों में खोये रहते हैं, पता नहीं कब दिन और कब रात होती है।❜❜
तुम बेवफाई करो हम फिर भी वफा करेंगे दाग दो खंजर चाहे सीने मैं हम उफ्फ तक ना करेंगे
याद ना दिलाओ वो पल इश्क़ का बड़ी लम्बी कहानी है, मैं किसी और से क्या कहूं जब उनकी ही मेहरबानी हैं...!!
मैं बेचैन सा लगता हूँ ,वो राहत जैसी लगती है, मै सो जाता हूँ ख्वाबों में,वो भीतर मेरे जगती है..!! मै हूँ जन्म जन्म का प्यासा,भरी हुई नदी वो, मेरे विचलित मन के भीतर,वो अग्नि सी तपती है..!!
सौदा कुछ ऐसा किया है तेरे ख़्वाबों ने मेरी नींदों से अब या तो दोनों आते हैं या फिर कोई नहीं आता है
घर में भी दिल नहीं लग रहा, काम पर भी नहीं जा रहा, जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा, रात के तीन बजने को हैं, यार ये कैसा महबूब है? जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
दिल में बसे हो जरा ख्याल रखना अगर वक़्त मिलजाए तो याद करना हमें तो आदत है तुम्हें याद करने की तुम्हें बुरा लगे तो माफ़ करना
मेरी मोहब्बत का सफ़र तो बस तेरी ही दहलीज़ तक ये हीर तेरे इश्क़ में तो हम हमसफ़र बन जाएँगें तुम दिल हो बस हम तेरी नज़र बन जाएँगें
तेरे नाम के धागे भी खोल दिए हैं हमने...!! बन्धनो में इश्क़ अच्छा नहीं लगता हमें..!!
तेरे अहसास की खुशबू रग रग में समाई है, अब तू ही बता क्या इसकी भी कोई दवाई है।
हर कोई मेरा हो जाए ऐसी मेरी तक़दीर नही मैं वो शीशा हूँ जिसमे कोई तस्वीर नही दर्द से रिश्ता है मेरा खुशियाँ मुझे नसीब नही मुझे भी कोई याद करे क्या मैं इतनी भी खुशनसीब नही
तुम भी मेरी तरहा ये दर्द सहती हो क्या तुम अब भी मेरी आखों से बहती हो क्या मैं अब बस रब की इबादत करता हूं तुम भी अब मुझे बेवफा कहती हो क्या ये आधी रात में मेरे आसूं क्यों निकल आए तुम अब भी मेरे दिल में रहती हो क्या
तेरे ख्याल में ही बीत रहा है हर लम्हा मेरा क्योंकि... इश्क़ भी तुझसे है और ख्याल भी तेरा है !!
कभी तो खत्म होगी ये उदासियां ये तन्हाईयां एक दिन तो अच्छा होगा चार दिन की जिंदगी में
शौक से तोङो दिल मेरा मुझे क्या परवाह तुम्ही रहते हो इसमे अपना ही घर उजाङोगे
धड़कने तेरे साथ चली गई अब ये दिल खामोश रहता है जिक्र नहीं करता मैं किसी से तेरा नाम सिर्फ जहन में रहता है उजालों से नफरत हो गई मुझे ये दिल अंधेरों को घर कहता है बेवफा नहीं शायद मजबूर था वो जिसे दिल आजतक हमसफर कहता है मिट जाए ये मनहूस लकीरें हाथो को वो पागल पत्थरों पे पटकता रहता है क्या मजाल एक बार झपक जाए सीने का दर्द आंखो से बहता रहता है
वो मोहब्बत भी तुम्हारी थी नफरत भी तुम्हारी थी, हम अपनी वफ़ा का इंसाफ किससे माँगते.. वो शहर भी तुम्हारा था वो अदालत भी तुम्हारी थी.
ख़वाबों में जीने की जब आदत पड़ जाती है, हक़ीक़त की दुनिया तब बे-रंग नज़र आती है, कोई इंतज़ार करता है मोहब्बत का, तो किसी की मोहब्बत इंतज़ार बन जाती है।
मामला सारा इश्क़ का है साहिब वरना, किसी की इतनी औकात नहीं हमे बर्बाद कर सके
इश्क हुआ है हमसे तो हमसे मुलाकात कीजिए ।।। आप वफा की उम्मीद रखते है पहले खुद तो वफा कीजिए
तेरे होने पर खुद को तन्हा समझू, मैं बेवफा हूं या तुझको बेवफा समझू, जख्म भी देते हो मरहम भी लगाते हो, ये तेरी आदत है या इसे तेरी अदा समझू..!!
तुम्हारी यादों का,कैसे हम जहर खाएं किस जगह मिलेगा,कहा मिलने आएं मौत भी तेरी ही तरह बे बफा निकली देख मेरे लिए भी खड़ी है बाहें फैलाए 💖
तन्हा कर गया वो शख्स फ़क़त इतना कह कर.... सुना है मोहब्बत बढ़ती ही है बिछड़ जाने के बाद ...
चुप रह कर भी कह दिया, सब कुछ ये मेरा सलीका था, और तुम सुनकर भी समझ, नही पाए ये उनका प्यार था।
नहीं रही शिकायत अब तेरी नज़र अंदाज़ी से तू बाकियों को खुश रख हम तनहा ही अच्छे है।
प्यार किया नादान थे हम, गलती हुई क्योंकि इंसान थे हम, आज जिन्हें नज़रें मिलाने में तकलीफ होती है कभी उसकी जान थे हम
वो नही आती पर अपनी निशानी भेज देती है, ख्वाबो में दास्ताँ पुरानी भेज देती है, उसकी यादों के पल कितने भी मीठे हैं, मगर कभी कभी आँखों में पानी भेज देती है।
मंज़िलों के ग़म में रोने से मंज़िलें नहीं मिलती हौंसले भी टूट जाते हैं अक्सर उदास रहने से.
खुशीयों की मंजिल ढुंढी तो ग़म की गर्द मिली चाहत के नगमें चाहे तो आहें सर्द मिली दिल के बोझ को दुना कर गया, जो ग़मखार मिला.
रूठी जो ज़िंदगी तो मना लेंगे हम, मिले जो ग़म वो सह लेंगे हम,बस आप रहना हमेशा साथ हमारे,तो निकलते हुए आंसूओं में भी,मुस्कुरा लेंगे हम।
हाल-ए-दिल अपना क्या सुनाएं आपको, ग़म से बातें करना आदत है हमारी, लोग मरते हैं सिर्फ एक बार सनम, रोज पल-पल मरना किस्मत है हमारी।
दर्द का साज़ दे रहा हूँ तुम्हे, दिल का हर राज़ दे रहा हूँ ‍‌तुम्हे ये गज़ल-गीत सब बहाने हैं, मैं तो आवाज़ दे रहा हूँ ‍‌तुम्हे.
हम तो मोहब्बत के नाम से भी अनजान थे एक शख्स की चाहत ने पागल बना दिया.
केवल दो ही चीजें पसंद हैं मुझे मेरी आशिकी में, एक तू और दूसरा तेरा साथ.
तेरा हाथ पकड़कर घूमने का मन करता है फिर चाहे वो हकीकत में हो या ख्वाबों में।
कल हवा में बिखर गया था मैं, फिर न जाने किधर गया था मैं, वो था इक ख़त्म होते रस्ते सा, उसपे चलकर ठहर गया था मैं, देर तक उसका इन्तेज़ार किया, फिर अकेला ही घर गया था मैं, उसकी आंखों में एक दरिया था, जिसमें इक दिन उतर गया था मैं।
❝मत कर यकीन यहाँ पलभर की मुलाकात पर, जरुरत ना हो तो लोग यहाँ सालों के रिश्तें भूल जाते है।❜❜
सरकारी बाबू जैसे तेवर है उस महबूबा के पयार मांगता हूं तो कहती है कल आना।
लड़के जब बड़े हो जाते हैं तब अपने मन की बात परिवार से नहीं प्रेमिका से कहते हैं।
मुझे कभी धोखा नहीं देना,मेरे आलावा किसी और का ना होना मर जाऊँगी मै आपके बगैर आपने मुझे जीना सिखाया है.
सच कहो तो उन्हें ख्वाब लगता है, और शिकवा करो तो उन्हें मज़ाक लगता है, हम कितनी शिद्दत से उन्हें याद करते है, और एक वो हैं जिन्हें ये सब इत्तेफाक लगता है।
जिसने हमको चाहा उसे हम चाह न सके, और जिसको हमने चाहा उसको हम पा न सके।
क्यों अनजाने में हम अपना दिल गवां बैठे, क्यों प्यार में हम धोखा खा बैठे, उनसे हम अब क्या शिकवा करे क्योंकि गलती हमारी ही थी, क्यों हम बेदिल इंसान से दिल लगा बैठे। 
तेरी याद में मजनु बन गए हैं , तु आके लैला का किरदार निभा दे ।  मैं कहीं निट 🥃 पिके ना मर जाउ , तु आके अपने हिसाब से पेक बना दे ।।
कल हवा में बिखर गया था मैं, फिर न जाने किधर गया था मैं, वो था इक ख़त्म होते रस्ते सा, उसपे चलकर ठहर गया था मैं, देर तक उसका इन्तेज़ार किया, फिर अकेला ही घर गया था मैं, उसकी आंखों में एक दरिया था, जिसमें इक दिन उतर गया था मैं।
लिख रहा हूँ मैं ऐसी चिट्ठियाँ मोहब्बत में जैसे मुझको मिलनी हों डिग्रियाँ मोहब्बत में हैं बड़ी ही अद्भुत सी शक्तियाँ मोहब्बत में शेर बन के बैठी हैं बकरियाँ मोहब्बत में याद जो किसी को भी एक पल न करता था आ रही हैं उसको भी हिचकियाँ मोहब्बत में कॉल तेरी आते ही फूल खिलने लगते हैं और उड़ने लगती हैं तितलियाँ मोहब्बत में जंग में जिन्हें अब तक तुम झुका न पाए थे झुक रही हैं वो सारी पगड़ियाँ मोहब्बत में
सपने हल्के थे... उड़ गए हवाओं में... ज़िन्दगी रह गई... भारी भारी...
मुझे तुमसे मोहब्बत हो गई है, ये दुनिया ख़ूबसूरत हो गई हैं, ख़ुदा से रोज तुम को माँगता हूं, मेरी चाहत इबादत हो गई है,
वो चेहरा चाँद है, आँखें सितारे, ज़मी फूलों की जन्नत हो गई है, बहुत दिन से तुम्हें देखा नहीं है, चले भी आओ मुद्दत हो गई है।
जितना बन कर दिखाती है इतनी तो बदतमीज नहीं बात ना कर मुझसे यार बोलने की मुझे भी तमीज नही इशक कर के बदल जाऊ यार इश्क है कोई कमीज नही
काश कि वो लौट के आयें मुझसे ये कहने कि तुम कौन होते हो मुझसे बिछड़ने वाले😢
बात आगे बढ़ी गई है तो क्यों नहीं एक हो जाते हैं आपने तो सही बोला कि तुम बिन अच्छा नहीं लगता पर यह भी सच है मुझे तेरी खुशी के सिवा कुछ अच्छा और नहीं लगता
यही खूबी हैं और खराबी भी कि हम हर हाल में जी लेते हैं
बस इतनी सी उम्र चाहिए ना मरु तेरे पहले और ना जियू तेरे बाद...
❝उम्र सफर कर रही है, और मैं ख्वाहिशे लेकर वही खड़ा हूँ।❜❜
खामोशी में ही राहत होती है लफ्जों का सफर थका देता है
नया सुनकर अब क्या करना चाहते हो आशिक़ लगते हो अल्फाजों से मरना चाहते हो
छुपी होती है लफ्जों में गहरी राज की बातें लोग शायरी समझ के बस मुस्कुरा देते हैं
अब नहीं रही शिकायत तुमसे, तू दूसरो को खुश रख हम तन्हा ही अच्छे है
रफ्ता रफ्ता वो तुम्हे अच्छी लगने लगेगी अजनबी है आज, कल तुझे अपनी लगने लगेगी
आओ आज महफ़िल सजाते हैं तुम्हें लिखकर तुम्हें ही सुनाते हैं
वो कहते है ना कि कुछ बेहतर सोचो तो बेहतर ही होगा, मैंने सोचा की तुम्हे ही सोचु तुमसे बेहतर क्या होगा..
दुख अपना अगर हम को बताना नहीं आता तुम को भी तो अंदाज़ा लगाना नहीं आता
क़िस्मत थी उनकी... जिन्हें वो मिल गए होंगे...सितारे गर्दिश में हो अगर... जिंदगी से मौत तक माँगे नहीं मिलती...!!
ख़ुशी कहां...हम ग़म चाहते हैं...! ख़ुशी उन्हें दे दो...जिन्हें हम चाहते हैं...!!
निगाह- ए- इश्क का अजीब ही शौक देखा तुम ही को देखा और बेपनाह देखा
❝कुछ ख़्वाहिशें, कुछ हसरतें अभी बाक़ी हैं, टूटकर भी लगता है, टूटना अभी बाकी हैं।❜❜
जिससे कह दो कि वो जरुरी है... वही दामन छुङाने लगता है...
अगर यादों की कीमत एक पैसा भी होती,,, तो आज तुम मेरे अरबों के कर्जदार होते।।।
तुमने ही लगा दिया इल्जाम बेवफाई का, मेरे पास तो वफ़ा का गवाह भी सिर्फ तुम थे
महोब्बत दो लोगो के बिच का नशा है जिसे पहेले होश आ गया वो बेवफा है
आँखों से भी लिखी जाती है दास्तानें, हर कहानी को कलम की जरूरत नहीं होती ..
ये दिल डूबेगा समंदर में किसी के हम भी तो लिखे होंगे मुकद्दर में किसी के
तुम बीती रात की दास्तां खाक जान पाओगे मैं बेशर्म इंसान हूं कल फिर मुस्कुराता मिलूंगा।
तकलीफ तो मुझे भी होती  है मगर ये बात हौंसला देती है कि जब तुम रह सकते हो मेरे बगैर तो मैं क्यूँ नहीं!!!
तेरी परछाई बनकर तेरे साथ रहने का इरादा करते है....!! कभी छोड़ेगे नहीं साथ तेरा तेरे साथ मरने का वादा करते है......!!
किसी को बेवफा कहते नहीं हम हमें भी अब बदलना आ गया है किसी की याद में रोते नहीं हम हमें चुपचाप जलना आ गया है गुलाबों को तुम अपने पास ही रखो हमें कांटों पे चलना आ गया है..!!!
कुछ भी ना बचा कहने को हर बात हो गई, आओ कही शराब पिए बहुत रात हो गई ।
इश्क के समन्दर में कूदे थे हम... ना सहारा मिला ना किनारा डुबना तो था ही..!!
मेरी जिंदगी से कुछ दर्द, हटा दे कोई कौन लिखता है किस्मत बता दे कोई
दिल को थोड़ा काबू में रखिए जनाब प्यार सूरत से नही दिल से होता है चेहरा देखना छोड़िए और दिल को पढ़ा कीजिए....
दूसरे शहर में कैसे इश्क़ करेगी वो, जिसने अपने शहर के ही लडक़े से धोखा खाया हो...
पढ़ रहा हूँ इश्क़ की किताबें दोस्तों,अगर बन गया वकील तो बेवफाओं की खैर नहीं.
*नज़र से "नज़र" मिलाकर तुम "नज़र" लगा गए....* *ये कैसी लगी "नज़र" की हम हर "नज़र" में आ गए....*
कितना महफूज़ था गुलाब काँटों की गोद में, लोगों की मोहब्बत में पत्ता-पत्ता बिखर गया।
उदास नज़रो में ख़्वाब मिलेंगे, कभी काटे तो कभी गुलाब मिलेंगे, मेरे दिल की किताब को मेरी नज़रो से पढ़ कर तो देखो, कही आपकी यादे तो कही आप मिलेंगे।
❝मोहब्बत ही होती है शायद सबसे बड़ी गुनाह, इसलिए अकसर मिलती है जुदाई की सजा।❜❜
वो दौर भी आया सफ़र में, जब मुझे अपनी ही पसंद से नफरत हुई।।
फिक्र है कुदरत को मेरी तन्हाई की, जागते रहते हैं रात भर सितारे मेरे लिए.
तुम अगर कुछ देर रूकते तो तुम्हें मालूम होता किस तरह बिखरे पलों में मैं बहाने चुन रहा था।
जाने कैसी नज़र लगी ज़माने की, अब वजह मिलती नहीं मुस्कुराने की।
❝बस पत्थर बनकर ही रह जाता ताजमहल, अगर इश्क इसे अपनी पहचान न देता।❜❜
कब तक रखे हम किसी को अपने ख्यालों में, अब किसी के ख़यालो में आने को जी चाहता है.
बस वही पर खत्म हो जाती है बर्दाश्त की सरहद....जब  दिल दुखाने में पार कर जाता कोई अपनी हद....
एक तवायफ़ से दोस्ती थी मेरी, वो मुझे शरीफों के किस्से सुनाती थी!
मैंने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक्त आने पे कर जाऊंगा, तुम मुझे ज़हर लगते हो, मैं एक दिन तुम्हे पीकर मर जाऊंगा।
न जाने किस तरह का इश्क कर रहे हैं हम, जिसके हो नहीं सकते उसी के हो रहे हैं हम।
कौन करता है यहा प्यार निभाने के लिए दिल तो बस खिलौना बन गया है जामने के लिए...
❝अगर आँसू बहा लेने से यादें बह जाती तेरी, तो कसम से एक दिन जी भर के रो लेते।❜❜
नुक़्स  इतने न  निकालें जनाब लोगों में कुछ तो अच्छा भी होगा खराब लोगों मे
एक तो ये कातिल सर्दी, ऊपर से तेरी यादों की धुंध.. बड़ा बेहाल कर रखा है, इश्क के मौसमों ने मुझे..
बात नजरों की करती हो .... तो नजरें मिलाओ ना..! बात एहसासों की करती हो ..... तो अपने अहसास मेरे लिए जताओ ना..! बात मेरे बदले मिज़ाज की करती हो..... तो तुम अपना पुराना मिज़ाज दिखाओ ना.! वादा है मेरा, मै उसी तरह मिलूंगा तुम्हे, जैसे तुम्हें शरुआत में मिला था.... बस शर्त ये है, कि तुम उसी पुराने अंदाज में एक बार फिर आओ ना..!
भरोसा, दुआ, वफ़ा, ख्वाब, मोहब्बत, कितने नामों में सिमटे हो, सिर्फ एक तुम।
ख़ूबसूरत तों पहलें भी बहुत था, हमने चाहा तो अजब ढंग से निखरा है वो शख़्स...
मोहब्बत करना गुनाह तो नही फिर मोहब्बत के बदले सजा क्यों मोहब्बत करना गुनाह तो नही फिर मरहम की जगह जख्म क्यो मोहब्बत करना गुनाह तो नही फिर खुशी के बदले दर्द क्यों
अगर रिश्ता निभाना है ना तो कुछ चीजों को नजरंदाज करना सीख लो वो क्या है ना अक्सर जो लोग हर बहस जीतते है वो रिश्ता हार जाते है
मोहब्बत का जहां नाम होता है रोना,, तड़पना,, दर्द वहां आम होता है खुश नसीबों को कभी मोहब्बत नहीं मिलती ये तो, बदनसीबों का ही,, काम होता है
मेरी बदनामी से सुकून मिला है तुझे तो मुझे गवारा भी नही साहिल, समंदर, किस्से, कहानी ये सब कहने की बातें हैं अब जब मेरी आँखों से छलके आसुओं पर हक़ तुम्हारा भी नहीं
उनकी नशीली आंखें हैं मगर वो कभी मदहोश नहीं होती इतना नशा आंखों में रख कर भी वो कभी बेहोश नहीं होती और कभी तुम रातों की खामोशी को गौर से सुनो यार टूटे दिल की धड़कने बहुत शोर करती है रातें खामोश नहीं होती
मेरी आँखों में मोहब्बत के जो मंज़र हैं तुम्हारी ही चाहतों के समंदर हैं मैं हर रोज चाहता हूँ कि तुझसे ये कह दूँ मगर लबों तक नहीं आता जो मेरे दिल के अंदर है।
आंखों के आंसुओं को हम किसी और की आंखों से गिरने नहीं देते खुद सह लेते हैं दर्द का अपना समझकर किसी अपने को हम दर्द से गुजरने नहीं देते
मौसम बहुत सर्द हो चला, ऐ दिल... चलो कुछ ख्वाहिशो को आग लगाएं!
मोहब्बत की हर गली गुमनाम क्यों है जुदाई और मौत इश्क़ का अंजाम क्यों है
इन्सान सबसे सस्ता मोहब्बत के नाम पे बिकता है और सबसे महंगी इन्सान को मोहब्बत पड़ती है
कुछ ख्वाहिशों की कस्तियों का डूब जाना ही तय होता है.. क्योंकि हर कस्ती के नशीब में किनारा नही होता है....
कसूर तो था इन निगाहों का, जो चुपके से उनका दीदार कर बैठी। हमने तो खामोश रहने की ठानी थी, पर बेवफा जुबान इज़हार कर बैठी।।
कुछ भी ना बचा कहने को हर बात हो गई, आओ कही शराब पिए बहुत रात हो गई ।
तेरा सफ़र ही मेरा सफ़र क्यों नहीं बन जाता, अजनबी तू मेरा हमसफ़र क्यों नहीं बन जाता। मकां दर मकां बदल रहा हूँ एक मुद्दत से मैं, तेरा दिल ही अब मेरा घर क्यों नहीं बन जाता!!
अब इस इश्क पर क्या लिखूं , जब भी कुछ लिखता मुझे मेरी बर्बादी याद आती है।
हजारों उलझनें राहों में, और कोशिशें बेहिसाब... इसी का नाम ज़िंदगी है, चलते रहिए जनाब...
अब किसी गैर का कब्जा है उनके दिल पर, यानी बेघर हो गए हैं हम अपना मकान होते हुए।
तुम्हारे बाद ये दुख भी तो,सहना पड़ रहा है किसी के साथ मजबूरी में,रहना पड़ रहा है मुझको दोस्ती नहीं तेरी मोहब्बत चाहिए थी मुझे अफसोस है ये मुझको,कहना पड़ रहा है
कहो तो एक ख्वाब मुक्कमल कर दूं, तेरे नाम अपना हर एक पल कर दूं, मुझमे डूब कर तुम कभी निकल ही न पाओ, कहो तो अपने आप को दलदल कर दूं।
उसकी नफरत भरी नजरों के तीर मेरी जान लेने का बहाना था, मेरे दिल के टुकडे हो गया और लोगों ने कहा क्या निशाना था।
मुझे मालूम है कि ये ख्वाब झूठे हैं और ख्वाहिशे अधूरी हैं, मगर जिन्दा रहने के लिए कुछ गलतफहमियाँ भी जरूरी हैं ।
हमें शायर समझ के यूं नजर अंदाज न करिये, नजर हम फेर ले तो तेरी चाहतों का बाजार गिर जायेगा....
यारियाँ ही रह जाती है मुनाफ़ा बनके । मोहब्बत के सौदों में नुक़सान बहोत हैं ।।
जला के मेरे दिलं को देखो तो ओ कैसे खुश हो रहा देख के उनकी खुशी Hayye मेरा तुटा दिलं कितना झूम रहा
वो बिछड़ के हमसे ये दूरियां कर गई, न जाने क्यों ये मोहब्बत अधूरी कर गई, अब हमे तन्हाइयां चुभती है तो क्या हुआ, कम से कम उसकी सारी तमन्नाएं तो पूरी हो गई।
मत कर हिसाब तू मेरी  मोहब्बत का वर्ना ब्याज में ही तेरी   जिन्दगी गुजर  जाएगी...
मुझे कोई गम नहीं के तू मेरे साथ ना हो बस फिक्र है तेरे हाथ में कोई गलत हाथ ना हो
ये इश्क़ भी एक लत है बहुत तड़पाता है दिल भी नहीं लगता कहीं दिल लग जाता है
तेरी नज़दीकियां सुकूँ देती हैं मगर तुझसे फासला रुलाता नहीं या तो दम नहीं है तेरी जुदाई में या इश्क़ करना हमें आता नहीं
आज बड़े दिनों बाद वो मिले और मुस्करा के चल दिये, खुदा कसम नींद न खुलती तो दूसरी बार दिल टूटने पर मर ही जाते शायद
मैंने इश्क का दस्तूर निराला देखा मैने हर गोरी लड़की के साथ एक लड़का काला देखा
मिले हर लडका, लड़की को संगमरमर सा महबूब तो जमाने से ये कालिया , कलूटी क्या मर जाए डूब
मेरी ज़िन्दगी के राज़ में एक राज़ तुम भी हो.... मेरी बंदगी की आस में एक आस तुम भी हो....तुम क्या हो मेरे, कुछ हो या कुछ भी नहीं मगर....मेरी ज़िन्दगी के काश में एक काश तुम भी हो.....
आसान तो नहीं रहा, बेशक बिछड़ना पर बिछड़ना बेशक ज़रूरी था शायद
तलब अपनी बढ़ाओ पहले फिर हम से प्यार करना, इश्क जब ना संभले तुमसे तब ही हम से इजहार करना..!
तुम्हारी आँखों से काश कोई इशारा तो होता कुछ मेरे जीने का सहारा तो होता तोड़ देते हम हर रसम ज़माने की एक बार ही सही तुमने पुकारा तो होता
मेरी ज़िन्दगी के राज़ में एक राज़ तुम भी हो.... मेरी बंदगी की आस में एक आस तुम भी हो.... तुम क्या हो मेरे, कुछ हो या कुछ भी नहीं मगर.... मेरी ज़िन्दगी के काश में एक काश तुम भी हो.....
पानी से प्यास ना बुझी तो, मैखाने की तरफ चल निकला... सोचा शिकायत करूं तेरी खुदा से पर वो खुदा भी तेरा आशिक निकला..
हर बार किस्मत को कसूरवार कहना ठीक नहीं।। कभी कभी हम उसकी भी चाह कर बैठते है... जो हमारे लिए बना ही नही!!
चुपके से आकर इस दिल में उतर जाते हो, सांसों में मेरी खुशबु बन के बिखर जाते हो. कुछ यूँ चला है तेरे ‘इश्क’ का जादू, सोते-जागते तुम ही तुम नज़र आते हो.
कुछ लडको को कुकिंग का इतना शोक होता है की हर लड़की के साथ अपनी दाल गलाने की कोशिश करते है
कुछ हार गई तक़दीर , कुछ टूट गए सपने, कुछ गैरो ने किया बर्बाद, कुछ भूल गए अपने.
ये दुनियाँ के तमाम चेहरे, तुम्हें गुमराह कर देंगें...  तुम बस मेरे दिल में रहो,,, यहाँ कोई आता जाता नहीं....
मैं इश्क़ का फ़कीर हूं साहिब, खैरात में चाहता हूं महबूब को।
तमन्ना है सिर्फ तुम्हे पाने की न जाने कैसी होंगी तू जिसके लिए दिन रात जागता हूँ में
इश्क करो तो मुस्कुरा कर, किसी को धोखा न दो अपना बना कर, करलो याद जब तक जिन्दा हैं, फिर न कहना चले गये दिल में यादे बसा कर


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